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लिखु मन की बात।

पूछ लिया किसी ने मैम हाल कैसा है   ? इतना ही कहा— ना ही दिन अच्छे हैं नाही हाल अच्छा है  निवाला छूटने पर याद आता है जेहन में  कोई न कोई तो…

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आज जब दर्द मुझे छू गया तो नयन कहां पीछे रहते

आज जब दर्द मुझे छू गया तो नयन कहां पीछे रहते  आंसूओं से भर  गए । ऐसा नहीं था कि आंसू पौंछने को रूमाल कम मिले।      लेकिन — मां का आंँचल याद आया और…

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बहुत टूटी हूं अनायास जब दुख आ जाता है।

बहुत टूटी हूं अनायास जब दुख आ जाता है। बिखर जाती हूं जब मेरे परिवार पर कोई आँच आती है सहनशक्ति भी जब साथ छोड़ने लगती है तब सोचती हूं — नारी हू…

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यदि आप चाहते हैं कि समाज आपको सिर आंखों पर रखें तो सिर्फ समूह इकट्ठा ना करें लेखिका विमला मीना

यदि आप चाहते हैं कि समाज आपको सिर आंखों पर रखें तो सिर्फ समूह इकट्ठा ना करें  समूह इकट्ठा करके आप समाज की नजरों में ऊंचा नहीं उठ सकते इसके लिए आ…

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थीम पोस्ट परिचय लेखिका विमला मीना

हंसकर यूं ही तुमने अपना परिचय दे दिया बात तो इतनी सी थी कसूरवार हम ठहरे कि —दिल ने तुम्हें पनाह दे दी सारे पथ भूल गया , राह तेरी बस याद रही मंज…

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बरसात ओर वरसाथ पर कविता डेली कविता By लेखिका विमला मीणा

बरसात— वरसाथ मिलते जुलते है ये शब्द लेकिन मायने बिल्कुल अलग, है ना । अभी बरसात wao मस्त बरस रही है धीमे धीमें फुहारे पड़ रही है जिन्हे हम झड़ कहते ह…

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एक गरीब बाप की बेटी टीचर बन गई डेली कविता By लेखिका विमला मीणा

एक गरीब बाप की बेटी टीचर बन गई जैसे तैसे करके उसके पिताजी ने रीना को मंजिल तक पहुंचा दिया । बात आ गई शादी की बेटी के पीले हाथ कर दे, किसी ने …

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बचपना अच्छा लगता है डेली कविता By लेखिका विमला मीणा

अच्छा लगता है जागते से ही सूरज की लालिमा में खुले आसमां से उड़ते पक्षियों का छत पर उतरकर दाना चुगना अच्छा लगता है आंगन में लगे…

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